Monday, July 16, 2018

ख्वाईश

आज फिर मेरे अरमानो-ओ-तूफान ने आज़माइश की है
आज फिर एक पुराने जहर ने साँसोंमें महकने की साजिश की है
जमाने से यु हि नही दूर रेहता सोपान
आज मेरे ही कुछ लम्हो ने मुज़से बग़ावत की ख्वाईश की है 

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भेट

सूर्य चंद्र मावळतो तिथे व्हावी आपली भेट एका हृदयांतल बोलणं दुसऱ्या हृदयाशी थेट