Monday, July 16, 2018

ख्वाईश

आज फिर मेरे अरमानो-ओ-तूफान ने आज़माइश की है
आज फिर एक पुराने जहर ने साँसोंमें महकने की साजिश की है
जमाने से यु हि नही दूर रेहता सोपान
आज मेरे ही कुछ लम्हो ने मुज़से बग़ावत की ख्वाईश की है 

Thursday, July 12, 2018

उत्तर

मैत्रीण मैत्रीण तू
बंद कुपीतलं अत्तर...
माझ्या रितेपणाचं
अनुत्तरित उत्तर... 

भेट

सूर्य चंद्र मावळतो तिथे व्हावी आपली भेट एका हृदयांतल बोलणं दुसऱ्या हृदयाशी थेट