Saturday, October 27, 2018

सहर

जिंदगी है दोस्त! आसान कैसे होगी,
ख्वाब टुटे बगैर सहर तो कैसे होगी।

भेट

सूर्य चंद्र मावळतो तिथे व्हावी आपली भेट एका हृदयांतल बोलणं दुसऱ्या हृदयाशी थेट