खुद से खुद का ही तआरुफ़ न हो पाया। दरगाह मे था फकीर रातभर न सो पाया।
सूर्य चंद्र मावळतो तिथे व्हावी आपली भेट एका हृदयांतल बोलणं दुसऱ्या हृदयाशी थेट
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